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Tamanna ab Tum kahan ho

Tamanna ab Tum kahan ho

(Hindi Edition)

Nidhish Tyagi
Select Preferred Format

The feeling of not belonging is very strong in these stories and almost as strong and sharp is the vision which not just inhabits the characters but also peeps into the psyche of its readers. But also alongside is a reassurance, a feeling of oneness. At the centre of these stories is this duel between oneness and separation. Nidheesh’s stories portray the complexities of life in modern urban areas and also the sense of alienation. The stories portray the shallowness of life not just in its telling but also in its structure- some are just oneliners.

Note: This book is in the Hindi language and has been made available for the Kindle, Kindle Fire HD, Kindle Paperwhite, iPhone and iPad, and for iOS, Windows Phone and Android devices.

Imprint: Penguin

Published: Aug/2013

ISBN: 9780143421450

Length : 200 Pages

MRP : ₹150

Tamanna ab Tum kahan ho

(Hindi Edition)

Nidhish Tyagi

The feeling of not belonging is very strong in these stories and almost as strong and sharp is the vision which not just inhabits the characters but also peeps into the psyche of its readers. But also alongside is a reassurance, a feeling of oneness. At the centre of these stories is this duel between oneness and separation. Nidheesh’s stories portray the complexities of life in modern urban areas and also the sense of alienation. The stories portray the shallowness of life not just in its telling but also in its structure- some are just oneliners.

Note: This book is in the Hindi language and has been made available for the Kindle, Kindle Fire HD, Kindle Paperwhite, iPhone and iPad, and for iOS, Windows Phone and Android devices.

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Nidhish Tyagi

निधीश त्यागी का जन्म 1969 में जगदलपुर, बस्तर में हुआ और बचपन छत्तीसगढ़ के विभिन्न कस्बों–जगदलपुर, नारायणपुर, डौंडी अवारी, जशपुरनगर, गरियाबंद, नगरी सिहावा के सिविल लाइंस के खपरैल वाले सरकारी मकानों में बीता । मध्यप्रदेश के सैनिक स्कूल, रीवा के चंबल हाउस में कैशोर्य, जहां से फौज में चाहकर भी नहीं जा सके । बाद में राजधानी बनने से पहले वाले रायपुर के शासकीय आदर्श विज्ञान महाविद्यालय में बीएससी करते हुए डेढ़ साल फेल (एक साल पूरा फेल, एक बार कंपार्टमेंटल) । पास होने के इंतज़ार में देशबंधु अख़बार में नौकरी की और विवेकानंद आश्रम की आलीशान लाइब्रेरी की किताबों में मुंह छिपाया । बाद में पंडित रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय से अंग्रेज़ी में स्नातकोत्तर करने की नाकाम कोशिश । दिल्ली में आईआईएमसी (भारतीय जनसंचार संस्थान) में दाख़िला मिला, वहां होस्टल नहीं मिला । बहुत बाद में लंदन की वेस्टमिन्स्टर यूनिवर्सिटी में बतौर ब्रिटिश स्कॉलर चीवनिंग फेलोशिप । वहां पहुंच कर लगा कि बहुत पहले आना चाहिए था किसी ऐसी जगह पर । डेबोनयेर हिंदी में नौकरी मिली, वह चालू ही नहीं हुई । इस बीच नवभारत नागपुर, राष्ट्रीय सहारा, ईस्ट वेस्ट टीवी, जैन टीवी, इंडिया टुडे, बिज़नेस इंडिया टीवी, देशबंधु भोपाल, दैनिक भास्कर चंडीगढ़ और भोपाल में काम किया । बीच में गुजराती सीख कर दिव्य भास्कर के अहमदाबाद और बड़ौदा संस्करणों की लॉन्च टीम में रहा । बेनेट कोलमेन एंड कंपनी लिमिटेड के अंग्रेज़ी टैबलॉयड पुणे मिरर के एडिटर । फिर चंडीगढ़ के अंग्रेज़ी द ट्रिब्यून में चीफ न्यूज़ एडिटर । आजकल बीबीसी हिंदी में संपादक ।